क्या चुनाव से पहले गिर सकती है महाराष्ट्र की सरकार. ?

क्या चुनाव से पहले गिर सकती है महाराष्ट्र की सरकार. ?

क्या है आधार ?

१ : उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने अपने इस्तीफे

Not all is well in the ruling Mahayuti alliance after the dismal performance in Lok Sabha elections in Maharashtra
5th जनवरी को उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने अपने इस्तीफे की पेशकश की. उन्होंने अपने बात में कहा की वो बीजेपी के महाराष्ट्र में हुए ख़राब प्रदर्शन की जिम्मेदारी लेते है. वैसे भी जिम्मेदारी तो किसी न किसी को लेनी ही पड़ेगी. बीजेपी के अंदर भी कुछ लोग इस बात का समर्थन करेंगे की हार का ठीकरा किसी न किसी के सर फोड़ा जाए.

तो जैसे ही देवेंद्र फडणवीस ने ये बात कही, विपक्ष को शायद लगा की अब तो सरकार गिर सकती है. क्युकी ये सब जानते है की शिंदे को मुख्यमंत्री बने रहने के लिए सर्कार और पार्टी में देवेंद्र फडणवीस को बने रहना जरूरी है.

वैसे वो बात तो याद ही होगी आप लोग को , " मेकअप करके मिलने जाने की बात" . और सुबह सुबह जाकर वापस आ जाने वाली बात.

Devendra Fadnavis meets Amit Shah after Maharashtra LS polls drubbing; here's what happened

तो ये तो बहुत ही जरूरी है की देवेंद्र फडणवीस सर्कार में बने रहे, जिससे ये सर्कार बची रह सकती है.

२ : अजित पवार ने बुलाई विधायकों की बैठक

अजित पवार ने अपने गट के विधायकों की बैठक बुलाई. जैसा की हम सब जानते है आने वाले दिनों में विधानसभा चुनाव है। लेकिन हुआ यह की उस मीटिंग में ५ विधायक नहीं आये. उन्होंने अपने निजी कारन बताये। चुकि बारामती में अजित पवार ने अपनी पत्नी को सुप्रिया सुले के खिलाफ खड़ा किया था, उस हार के बाद क्या सारे विधायक अजित पवार गट में बने रहना चाहेंगे। लोकसभा चुनाव में अजित पवार गट को सिर्फ एक सीट मिली। वही शरद पवार को कही ज्यादा फायदा हुआ.

अब अगर शरद पवार अपनी पार्टी को कांग्रेस में विलय कर लेते है, जैसा की उन्होंने चुनाव के पहले अंदेशा बनाया था, तो कांग्रेस या यु कहे महाविकास आघाडी को ज्यादा फायदा मिल सकता है। तकरीबन ४० सीट विधानसभा में फंस सकती है.

अभी अगर अजित पवार के विधायक टूट के शरद पवार के पास जाने की इच्छा करते है तो क्या होगा। चुनाव होने से पहले सर्कार गिर सकती है

३ : क्या ये लोकसभा का प्रदर्शन एकनाथ शिंदे गट भी खुश है ?

अभी विधानसभा चुनाव में जनता के सामने फिर से मौका है ये बताने के लिए की कौन सी एनसीपी सही है या फिर कौन सी शिवसेना असली है

क्या अजित पवार के लिए शरद पवार ने अपने दरवाजे बंद कर दिए है. अगर सही कहा जाए तो राजनीति में कुछ भी असंभव नहीं है. हम सभी जानते है नेता अपना फायदा देख के पार्टी बदलता है और फिर अगर जरुरत पड़े और उसको अपना फायदा फिर से उसी पार्टी में दीखता है जिसे वो छोड़ के गया है तो वो जरा भी हिचकिचाए बिना वापसी कर लेता है.

उदाहरण के लिए : नितीश कुमार और अमित शाह की बात ले लीजिये.

Bihar chief minister Nitish Kumar postpones Opposition meet scheduled in  Patna - Telegraph India

कुछ दिनों पहले ही अमित शाह ने ये बात कही थी की नितीश कुमार के लिए NDA में अब कोई जगह नहीं है , लेकिन हुआ क्या , उसके अगले कुछ दिनों के बाद नितीश कुमार NDA में शामिल हो गए.

और आज उनकी ही सपोर्ट से नरेंद्र मोदी ३री बार प्रधानमंत्री बनने जा रहे है. शपथ ९थ जून को होगा.

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